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Monday, February 26, 2024

बाल संरक्षण पर चर्चा में एकजुट हुए बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, बाल कल्याण सम्बन्धित प्रमुख एजेण्डा बिन्दु पर किया गया मासिक समीक्षा बैठक

चन्दौली ( मीडिया टाइम्स )। सरकार द्वारा भी समय-समय पर विभिन्न तरह के कानून

 व बिल भी लाये गये जिसमे किशोर न्याय (देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, पाक्सो एक्ट, बाल बिवाह प्रतिषेध अधिनियम के साथ साथ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के बारे में विस्तृत चर्चा की, समाज में बच्चों के प्रति बढती हिंसा, यौन अपराध व शोषण से बचाव पर चर्चा करते हुए कहा कि इसके लिए चाइल्डलाइन 1098 जैसे सेवाएँ कार्यरत है जिन पर आसानी से कॉल करके बच्चों की मदद की जा सकती है। बाल संरक्षण में पुलिस की भूमिका काफी अहम होती है। पुलिस की सक्रियता से बाल संरक्षण को बल मिल सकता है। बच्चों के अधिकारों के प्रति पुलिस प्रशासन को सजग रहना जरुरी है। ताकि बच्चों को संविधान प्रदत्त अधिकार मिल सके। 

जिला बाल संरक्षण के निदेशक अशोक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि अगर कहीं नाबालिग लड़के या लड़की की शादी होती है तो इस तरह की शादी को रोकने के लिए पुलिस को पहल करनी चाहिए ताकि बाल विवाह निषेध कानून का अनुपालन हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि गर्भस्थ शिशु से लेकर 18 वर्ष से कम तक के बच्चे-बच्ची किशोर न्याय अधिनियम-2015 के अधीन आता है।

 प्रशिक्षण के दौरान निर्गत आदेश 

पाक्सो एक्ट में त्वरित कार्यवाही की जाय एवं समय से 161 एवं 164 सी०आर०पी०सी० का बयान समय से कराने के साथ ही साथ मेडिकल / विवेचना की कार्यवाही पूर्ण की जाय। बयान लेने वक्त आरोपित व्यक्ति अथवा उनका अधिवक्ता वहां नहीं रहना चाहिए। यह बयान पुलिस बाल कल्याण पदाधिकारी के रुप में लेगी।

जे0जे0 एक्ट के अन्तर्गत पंजीकृत अभियोगों मे बाल अपचारी का एसबीआर रिपोर्ट समय से किशोर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाये जिससे बाल अपचारियों के मामलों में सुधार/न्याय दिलाया जा सके।

एक युद्ध नशे के विरूद्ध अभियान - नाबालिक बच्चों द्वारा नशीली दवाओं और मादक पदार्थो के दुरूपयोग करने और अवैध तस्करी / व्यापार की रोकथाम हेतु वितरण (कोटपा) अधिनियम-2003 एवं औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (ड्रग्स एण्ड कॉस्मेटिक्स एक्ट) 1940 के तहत अनुपालनार्थ एवं रोक थाम हेतु निर्णय लिया गया है, जो "एक युद्ध नशे के विरूद्ध” अभियान चलाये जाने विषयक

बाल विवाह के प्रकरणों में जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार के लिए आंगनबाडी के सदस्यों द्वारा, ग्राम प्रधानो के द्वारा, स्वास्थ्य केन्द्रो के माध्यम से प्रमुख चौराहा व जनमानस के आने जाने के स्थानों पर पोस्टर / बैनर चस्पा कर मिडिया के द्वारा एवं सोशल मिडिया के द्वारा प्रचार प्रसार कर के जागरुक करना।

बाल श्रम-के सम्बन्ध में भी मिडिया, सोशल मिडिया, पोस्टर बैनर आदि चस्पा कर बाल श्रम के सम्बन्ध में जागरुक करना। क्योंकि बाल श्रम कराने वाले व्यक्तियों का यह कृत्य अपराध के श्रेणी में आता है, जनता को बोध कराना।

दूर ट्रैवेल्स एजेन्सी/एजेण्ट जो विदेश में नौकरी के नाम पर अवैध वसूली / अनाधिकृत उत्प्रवासन के कार्यों में संलिप्त है जो बेलगाम अवैध भर्ती एजेन्टों के विरूद्ध कृत कार्यवाही की जाये।

भूले-भटके बच्चों को यदि पुलिस बरामद करती है तो ऐसे बच्चों को पुलिस को सबसे पहले बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करना चाहिए। इस मामले में आगे का निर्णय बाल कल्याण समिति लेगी।

18 वर्ष से कम आयु के विधि विवादित बच्चे को पुलिस को सामान्य न्यायालय में प्रस्तुत नहीं कर किशोर न्याय मंडल के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करना चाहिए। ऐसे बच्चों के मामले में आगे की निर्णय किशोर न्याय मंडल लेगी।

-विशेष किशोर पुलिस इकाई के नोडल पदाधिकारी एएसपी विनय कुमार सिंह नामित है। जबकि सभी थानाध्यक्ष बाल कल्याण पदाधिकारी नामित हैं।

साथ ही समीक्षा बैठक के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक श्री विनय कुमार सिंह ने सम्बोधित करते हुए कहा कि हम सबकी जिम्मेदारी है कि किसी भी बच्चे का शोषण न हो, चाहे वह देखभाल व संरक्षण की श्रेणी का हो या विधि के विरूद्ध कार्य श्रेणी का हो हमें हर समय बच्चे का सर्वोत्तमहित देखना है

रिजवाना परवीन मण्डल अध्यक्ष यूनीसेफ ने बालकों के विरुद्ध हो रहे अपराधों में की जा रही कार्यवाहियों व बाल किशोरों के खिलाफ पंजीकृत मामलों की विवेचनाओं की समीक्षा भी किया। पीड़ित बालकों से संबंधित सूचनाओं को गंभीरता से लेने व दोषियों के विरुद्ध किशोर न्याय अधिनियम के तहत अविलंब कार्यवाही करने पर जोर दिया।

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