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Sunday, February 4, 2024

भूमि अधिग्रहण कानून न पालन करने का आरोप लगाते हुए किसानों के उचित मुआवजे व अधिग्रहण की नोटिस ज्यादा जमीन लेने पर उठाया सवाल

 भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग भारत माला परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण पर सवाल उठाते हुए आईपीएफ  नेता अजय राय  व पूर्व जिला पंचायत सदस्य तिलकधारी बिन्द ने कहा कि विकास करने व जाम से मुक्ति दिलाने के नाम पर किसानों को सरकार भूमिहीन बना रहीं है।



चंदौली। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग भारत माला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण में जंहा सरकार व प्रशासन संसद में  बने भुमि अधिग्रहण कानून का पालन नहीं कर रही हैं वहीं भाजपा सरकार विकास के नाम पर और जाम से मुक्ति दिलाने के नाम पर किसानों को भूमिहीन बना रहीं हैं उक्त बातें आज आईपीएफ के राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय ने उक्त परियोजना के लिए रेवंसा ,बरहुली , कठौरी ,नई कोट ,खरगीपुर ,लौदा ,हिरावनपुर  सहित कई गांवों के किसानों जिनकी जमीन को अधिग्रहण किया जा रहा हैं उन्हें भुमि अधिग्रहण कानून के तहत उचित मुआवजा न मिलने पर  किसानों की तरफ से मुआवजे की मांग उठाया!




उन्होंने कहा कि यह सरकार किसानों को छल रहीं हैं जंहा रेवंसा के किसानों को मात्र 3.57 लाख की रेट दे रहीं हैं बरहुली के किसानों को 1.70 लाख  ,देवई के किसानों को 1.40 लाख , कठौरी के किसानों को 1.50 , लौदा के किसानों को 2.40 के रेट से मुआवजा मिल रहा हैं  जबकि बहुत ही कम हैं ! किसानों के पेट पालने की मुख्य जरिया भुमि अधिग्रहण करने व अधिग्रहण की जमीन का उचित मुआवजा न मिलने से काफी आक्रोश हैं !


आज आईपीएफ राज्य कार्य समिति सदस्य अजय राय व कई बार रह चुके जिला पंचायत सदस्य तिलकधारी बिन्द ने रेवंसा , बरहुली , कठौरी ,लौदा सहित कई गांवों का दौरा किया  और बरहुली में किसानों के बीच बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों को छलने का काम कर रहीं हैं किसानों को उचित मुआवजा न देना किसानों का शोषण हैं ! संसद में बनें  भूमि अधिग्रहण कानून का भी उलंघन हैं।


जंहा भाजपा सरकार किसानों के लिए बड़ी बड़ी बातें करती हैं वहीं सच्चाई हैं कि उनके उपर दमन व उनका शोषण कर रहीं हैं ! जबकि संसद में भूमि अधिग्रहण कानून बनाते समय सरकार ने वादा किया था कि भूमि अधिग्रहण उपजाऊ व कीमत की जमीन का  बहुत जन कल्याणकारी योजनाएं होंगी तभी अधिग्रहण होगा।


भूमि अधिग्रहण जिन किसानों का हों रहा हैं उसमें बरहुली के किसान महेंद्र बिंद ने कहा कि अधिग्रहण किए जा रही जमीन काफी उपजाऊ हैं और हम किसानों की जिन्दगी ज़ीने की सहारा  हैं लेकिन हमारी जमीन की अधिग्रहण किया जा रहा हैं वहीं बाजार दर से बहुत मुआवजा भी मिल रहीं हैं वहीं अधिग्रहण की जा रही जमीन की नोटिस से ज्यादा जमीन ली जा रहीं हैं। 


जमीन के रेट के मूल्यांकन को लेकर है। 2013 में जब कानून बना था जमीन अधिग्रहण का, तब उसमें लिखा था कि जब कभी सरकार या निजी क्षेत्र जमीन अधिग्रहण करेगा तो बाजार रेट का 4 गुना अधिक मुआवजा के तौर पर दिया जाएगा।


नियम अनुसार बाजार मूल्य निर्धारण का अधिकार राज्य सरकारों को हैं। अब इस मामले में यहां की सरकार है। अब यहाँ सरकार में बैठे लोगों ने किसानों को दोनों हाथों से लूट की खुली छूट की पैरोकारी करते हुए 2013 से 2023 तक, पिछले दस सालों में, कृषि जमीन के मूल्यांकन को बढ़ाया ही नहीं। बाजार मूल्य 2013 के रेट को ही रखे हुए है। इसका खामियाजा चंदौली समेत कई जिलों या कहें कि  हर जगह के किसानों को उठाना पड़ रहा है। कृषि भूमि की सरकार की नजर में कीमत मात्र 3 से 4 लाख रुपये एकड़ मात्र है और इसका 4 गुना 12 लाख रुपये एकड़ होता है, जबकि  चंदौली जिला की कृषि भूमि की कीमत कहीं भी 30 लाख रुपये एकड़ से कम नहीं। ऐसे में बाजार भाव से मुआवजा 1 करोड़ रुपये से ऊपर हो जाता है। अब एक करोड़ रुपये की जगह सरकार 12 लाख रुपया देना चाहती है, यही असहमति का बिंदु है हमारे लिए। इसलिए उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

द्वय नेताओं ने किसानों से कहा कि उचित मुआवजा व जितनी जमीन का अधिग्रहण का नोटिस मिला हैं उतनी किसानों की जमीन का अधिग्रहण होगा इसके लिए उच्च अधिकारियों से मिलकर अवगत कराया जाएगा।

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