भगवान भरोसे चकिया सावित्रीबाई फूले राजकीय डिग्री कालेज के छात्र-छात्राओं का भविष्य, स्नातकोत्तर महाविद्यालय में काफी दिनों से प्राचार्य सहित कई पद रिक्त - Media Times

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Saturday, February 25, 2023

भगवान भरोसे चकिया सावित्रीबाई फूले राजकीय डिग्री कालेज के छात्र-छात्राओं का भविष्य, स्नातकोत्तर महाविद्यालय में काफी दिनों से प्राचार्य सहित कई पद रिक्त

चकिया चंदौली ( मीडिया टाइम्स )। उच्च शिक्षा प्रदान करने के स्थल को महाविद्यालय कहते है, साथ ही बेहतर मार्गदर्शन हो इस लिए महाविद्यालय का विकास और पठन पाठन को सुचारु रूप से चला कर छात्र छात्राओं के भविष्य को उजागर करने में महाविद्यालय और शिक्षक की मुख्य विशेषता होती है, लेकिन आज चकिया नगर में स्थित सावित्रीबाई फूले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अपने हाल पर खुद रोना रो रहा है।

इसके साथ ही वहा प्रवेश लिए विद्यार्थी भी खुद को कमजोर और भगवान भरोसे खुद की पढ़ाई छोड़ दिए है। इसका प्रमुख कारण यह की कक्षाए न चलना। काफी दिनों से प्राचार्य सहित कई पद रिक्त होने के बाद भी अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। जिससे महाविद्यालय का कार्य सही ढंग से संपादित नहीं हो पा रहा है।

बता दें कि तहसील क्षेत्र में एकमात्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय है। जिसमें सिर्फ कला वर्ग की शिक्षा दी जाती है। वाणिज्य तथा विज्ञान विषयों की शिक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को बनारस जाना पड़ता है। ऐसे में बहुत से छात्र-छात्राएं विज्ञान तथा वाणिज्य वर्ग की शिक्षा लेने से वंचित रह जाते हैं। कला वर्ग से शिक्षा देने वाले यह महाविद्यालय पिछले 5 वर्षों से प्राचार्य विहिन चल रहा है। 1 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन प्राचार्य कपिलदेव राम का स्थानांतरण हो जाने के बाद आज तक यहां किसी भी प्राचार्य की नियुक्ति नहीं की गई। 

कॉलेज की प्रोफेसर रही ड़ाक्टर संगीता सिंह को चार्ज देकर महाविद्यालय का कार्य आज तक संपादित कराया जा रहा है। इसके अलावा बीते 20 अप्रैल को लाइब्रेरियन अनिल कुमार के देहांत हो जाने के बाद लाइब्रेरियन का पद खाली चल रहा है। महाविद्यालय की साफ सफाई के लिए परिचायक का पद भी पिछले 2 वर्षो से रिक्त पड़ा हुआ है। जिसके कारण समय-समय पर महाविद्यालय के रोवर्स रेंजर्स के छात्र छात्राओं से सफाई का कार्य निपटाया जाता है। चंदौली जिला के अति पिछड़े क्षेत्र में स्थापित इस राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दुर्व्यवस्थाओं का आलम बने रहने के बाद भी आज तक रिक्त पड़े पदों पर नियुक्ति नहीं की गई। जिससे अभिभावकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

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